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पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पिछले सात दशक से बलूचिस्तान के लोगों की आवाज़ कुचलता रहा है। अब पाकिस्तान सरकार ने मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट पर अनिश्चितकाल तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। मीडिया एजेंसी बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, यह मानवाधिकार संगठन जो गैर लाभकारी संगठन यानी एनजीओ होने का दावा करता है, इस प्रांत में काफी सक्रिय है। पाकिस्तान की इमरान सरकार ने इस एनजीओ पर बैन कर दिया है।
हर इलाकों से सूचनाओं इकट्ठा करता था एनजीओ
जानकारी के अनुसार, बलूचिस्तान में सक्रिय इस एनजीओ को कई तरह के मीडिया प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी स्वीडन, फ्रांस और यूरोप के कई देशों भी मौजूदगी है। पिछले कुछ सालों से यह संगठन बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों की जानकारियों को इकट्ठा करके इन सूचनाओं को अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और कुछ अन्य संगठनों को भेजता रहा है। इस संगठन में कई तरह के स्वयंसेवी कार्यकर्ता और समर्थक काम करते हैं, जो बलूचिस्तान के हर इलाकों से सूचनाओं को इकट्ठा करके रिपोर्ट तैयार करते हैं। अब पाकिस्तान सरकार ने मानवाधिकार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
संगठन का दावा, ईमानदार और निष्पक्ष मानवाधिकार संगठन
प्रतिबंध के बाद अब इस वेबसाइट को खोलने की कोशिश की जाती है तो सामने स्क्रीन पर ‘सुरक्षित सर्फ करें दिखाई पड़ता है। साथ ही उस पर लिखा आता है कि जिस साइट को आप खोलने की कोशिश कर रहे हैं उसमें ऐसी सामग्री है जो पाकिस्तान में देखने के लिए प्रतिबंधित है।’ संगठन के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान की इस कार्रवाई से संगठन को आघात पहुंचा है। संगठन का कहना है कि वह एक ईमानदार और निष्पक्ष मानवाधिकार संगठन है न कि बलूचिस्तान में युद्ध की एक पार्टी।
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बलूचिस्तान में मीडियाकर्मियों पर लगाए गए प्रतिबंध की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पारदर्शी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बावजूद बलूचिस्तान पोस्ट नेटवर्क को प्रतिबंधित किया गया था। इसके अलावा कुछ अन्य संगठन भी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। पत्रकार और मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि उन्हें बलूचिस्तान में काफी कड़े मीडिया प्रतिबंधों के तहत काम करना पड़ रहा है। पाकिस्तान सरकार द्वारा यहां जनता की राय को दबाया जाता है, राजनीतिक असंतोष को क्रूरता से रोका जाता है और बोलने की स्वतंत्रता पर भी पाबंदी लगाई जाती है। पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान के लोगों की आवाज़ को दबाता है।