बॉलीवुड

नौशाद: वो महान संगीतकार जिसने ‘मुगल-ए-आजम’ का संगीत देने से कर दिया था मना

सिनेमाई संगीत में नौशाद का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जिसे आने वाली हर पीढ़ी को याद रखना ही होगा। नौशाद संगीत की दुनिया का वो करिश्माई बंदा था जिसने अपने संगीत से ना जानें कितने ही करोड़ो दिलों को लूटा। संगीत जगत 26 दिसंबर को नौशाद की 100 वीं जयंती मनाने जा रहा है। नौशाद का जन्म साल 1919 में आज ही के दिन लखनऊ में हुआ था।

नौशाद के सुनहरे सफर की शुरुआत

नौशाद को पहली बार एक ऐसी फिल्म में हारमोनियम बजाने का मौका मिला जो कभी बन ही नहीं पाई। वो फिल्म थी ‘सुनहरी मकड़ी’। फिल्म पूरी तो नहीं हुई मगर इस फिल्म के बाद संगीत की दुनिया में उनकी दरवाजे खुल गये। इसके बाद उन्हें कई छोटे मोटे काम मिलते रहे।

फिल्म ‘प्रेम नगर’ बनी टर्निंग प्वॉइंट

साल 1940 में आई फिल्म ‘प्रेम नगर’ नौशाद के म्यूजिक कॅरियर में टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्हें पहली बार संगीत निर्देशन के रुप में काम करने का मौका मिला। बस फिर क्या था ये वही दौर था जब संगीत की दुनिया को नौशाद जैसा संगीतकार मिला।

फिल्म ‘रतन’ से मिली असल पहचान

नौशाद के म्यूजिक कॅरियर में ‘रतन’ पहली सफल फिल्म साबित हुई। साल 1944 में रिलीज हुई फिल्म ‘रतन’ में नौशाद ने ‘अंखियां मिला के जिया भरमा के चले नहीं जाना’ जैसे गीत से सफल हुए। फिल्म में उनके गीतों को मिली भारी सफलता के बाद वे 25 हजार रुपए पारिश्रमिक के तौर पर लेने लगे।

‘मुगल-ए-आजम’ में संगीत देने से कर दिया था इंकार

वे नौशाद ही थे जो अपने उसूलों के पक्के धनी थे। इससे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी है। बात साल 1960 की है। जब नौशाद को म्यूजिक इंडस्ट्री में तकरीबन दो दशक का लंबा समय हो गया था। आपको जानकर हैरानी होगी मगर बॉलीवुड की एपिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का संगीत देने के लिए नौशाद ने मना कर दिया था।

खबरों के मुताबिक निर्देशक के.आसिफ फिल्म के संगीत के सिलसिले में नौशाद के घर मिलने गए थे। घर में नौशाद हारमोनियम पर कुछ धुन तैयार कर रहे थे। तभी आसिफ ने हारमोनियम पर 50 हजार रुपये फेंक दिये। इस हरकत से वे बेहद गुस्सा हुए और पैसे वापस करते हुए उन्होने फिल्म में संगीत देने से इंकार कर दिया। आसिफ के काफी रिक्वेस्ट करने पर नौशाद फिल्म में संगीत देने के लिए राजी तो हो गए मगर इसके लिए एक पाई पैसा नहीं लिया।

बेहतरीन गानें

‘दुनिया के रखवाले’, ‘मधुबन में राधिका नाचे’, ‘मोहे भूल गए सांवरिया’, ‘मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे’ ‘नैन लड़ जहिएं’, ‘दुख भरे दिन बीते रे भैया’, ‘आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज न दे’, ‘आ जा मेरी बरबाद मोहब्बत के सहारे’,’मिलते ही आँखें दिल हुआ दीवाना’,’बचपन की मोहब्बत को दिल से न जुदा करना’,’दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूँढ रहा है’, ‘दिलरुबा मैंने तेरे प्यार में क्या क्या न किया’, ‘दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे’, ‘दो सितारों का जमीं पर है मिलन’ आज की रात जैसे कई बेहतरीन गानें हैं।

Sushma Champawat

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