Cartoonist R.K. Lakshman had second marriage with a woman named same of his first wife.
सुप्रसिद्ध भारतीय कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण की 24 अक्टूबर को 100वीं बर्थ एनिवर्सरी है। वे ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में वर्ष 1951 से शुरू हुए ‘द कॉमन मैन’ और उनकी सबसे मशहूर कार्टून स्ट्रिप ‘यू सेड इट’ के लिए काफी मशहूर थे। आरके लक्ष्मण की कार्टून कला का हुनर और कार्टून की दुनिया में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ जैसे बड़े देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया। ख्यातनाम कार्टूनिस्ट आर.के. लक्ष्मण की जन्म शताब्दी के अवसर पर पढ़िए उनके जीवन के बारे में कुछ अनसुने किस्से…
आर. के. लक्ष्मण का जन्म 24 अक्टूबर, 1921 को कर्नाटक राज्य के मैसूर में हुआ था। उनका पूरा नाम रासीपुरम कृष्णस्वामी लक्ष्मण था। उनके पिता तमिल भाषा के शिक्षक थे। वह अपने माता-पिता की आठ संतानों में सबसे छोटे थे। उपन्यासकार आर.के.नारायण उनके बड़े भाई थे। उन्होंने हाई स्कूल पास करने के बाद जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में आवेदन किया, लेकिन इसमें उनका एडमिशन नहीं हुआ। अंत में उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से कला में स्नातक की उपाधि हासिल की।
आर के लक्ष्मण ने अपने पूरे जीवन में दो शादियां की थीं। उनकी पहली शादी भरतनाट्यम नृत्यांगना व अभिनेत्री कमला से हुई थी, लेकिन बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने दूसरा विवाह कमला नाम की ही एक महिला से किया, जो बच्चों की किताबें लिखा करती थी। वर्ष 2003 में लक्ष्मण को पैरालाइसिस हो गया, जिसके बाद उनके बाएं हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था।
आर के लक्ष्मण ने अपने कॅरियर की शुरूआत रोहन समाचार पत्र और स्वराज्य व ब्लिट्ज जैसी पत्रिकाओं की थी। उन्होंने अपने बड़े भाई आर के नारायण की कहानियों को द हिंदू में चित्रित करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय अखबारों के लिए राजनीतिक कार्टून भी बनाए। लक्ष्मण ने मुंबई में अपनी पहली नौकरी द फ्री प्रेस जर्नल में बतौर राजनीतिक कार्टूनिस्ट के रूप में थी, जहां दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे उनके कार्टूनिस्ट सहयोगी हुआ करते थे।
वर्ष 1951 में लक्ष्मण ने टाइम्स ऑफ इंडिया के मुंबई दफ्तर में नौकरी करना शुरू किया, जिसमें वे करीब पचास साल तक रहे थे। उनका ‘कॉमन मैन’ कार्टून काफी प्रसिद्ध रहा, जिसमें वे समकालीन भारत, भारतीय राजनीति तथा बदल रहे भारतीय लोकतंत्र पर जमकर व्यंग्य किया करते थे।
लक्ष्मण की प्रमुख कृतियों में ‘द कामन मैन’, ‘स्पक्सि (इलोक्यून्ट ब्रस) ए सेलेक्शन ऑफ कार्टून्स फ्राम नेहरू टू राजीव’, ’50 इयर्स ऑफ इन्डिपेंडेन्स थ्रो द आइस ऑफ आर.के. लक्ष्मण’, ‘द बेस्ट आफ लक्ष्मण सीरीज’, ‘होटल रिवीरा’, ‘द मैसेन्जर’, ‘सर्वेन्ट्स ऑफ इण्डिया एण्ड द टनल ऑफ टाइम’ (आत्मकथा) है।
आर. के. लक्ष्मण वर्ष 1973 में भारत सरकार द्वारा देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्म भूषण’ और वर्ष 1984 में ‘रेमन मैग्सेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किए गए। वर्ष 2003 में भारत सरकार ने उन्हें एक बार फिर देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से नवाज़ा।
प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट आर. के. लक्ष्मण को यूरिन ट्रेक में संक्रमण और सीने में तकलीफ थी, जिसका वे पुणे के दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल में इलाज करा रहे थे। यहीं पर उनका 93 वर्ष की आयु में 26 जनवरी, 2015 को निधन हो गया। इस तरह महान भारतीय कार्टूनिस्ट लक्ष्मण ने दुनिया को अलविदा कहा।
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